रस और धà¥à¤µà¤¨à¤¿ सिदà¥à¤§à¤¾à¤¨à¥à¤¤ की मनोवैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤•ता
Abstract
पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨Â साहितà¥à¤¯à¤¶à¤¾à¤¸à¥à¤¤à¥à¤°à¥€à¤¯ गà¥à¤°à¤¨à¥à¤¥à¥‹à¤‚ से लेकर आधà¥à¤¨à¤¿à¤• काल तक के जो à¤à¥€ साहितà¥à¤¯ शासà¥à¤¤à¥à¤° के गà¥à¤°à¤¨à¥à¤¥à¥‹à¤‚ का पà¥à¤°à¤£à¤¯à¤¨ हà¥à¤† है उनमें साहितà¥à¤¯à¤¶à¤¾à¤¸à¥à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की मनोवैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤•ता सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿà¤¤à¤¯à¤¾ पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¿à¤¤ हà¥à¤ˆ है। इसका विसà¥à¤¤à¥ƒà¤¤ विवेचन à¤à¤¾à¤°à¤¤ मà¥à¤¨à¤¿ से ही आरमà¥à¤ हो जाता है, जिसको अनेक परवरà¥à¤¤à¥€ आचारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ ने à¤à¥€ गà¥à¤°à¤¹à¤£ किया है। रस के सनà¥à¤¦à¤°à¥à¤ में तो यह और à¤à¥€ महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£Â हो जाता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ कि कवि या कावà¥à¤¯à¤¶à¤¾à¤¸à¥à¤¤à¥à¤°à¥€ मानव मन का अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ किये बिना अपने कृतà¥à¤¯ में सफल नहीं हो सकता है। रस सिदà¥à¤§à¤¾à¤¨à¥à¤¤ की पृषà¥à¤ à¤à¥‚मि à¤à¥€ हमारी सूकà¥à¤·à¥à¤® मानसिक वृतà¥à¤¤à¤¿ पर आधारित है। विà¤à¤¾à¤µ, अनà¥à¤à¤¾à¤µ, वà¥à¤¯à¤à¤¿à¤šà¤¾à¤°à¥€ à¤à¤¾à¤µ, à¤à¤• चेतन मन की ही कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤¯à¥‡à¤‚ हैं तथा अनेक पà¥à¤°à¤•ार के जो à¤à¥€ कावà¥à¤¯à¤—त, रसगत, व साहितà¥à¤¯à¤—त विचार है वे मन की विशेष मनोदशा के परिचायक हैं। अतः यह कहा जा सकता है कि रस व धà¥à¤µà¤¨à¤¿ सिदà¥à¤§à¤¾à¤¨à¥à¤¤ के मूल में मानसिक वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤®Â की पराकाषà¥à¤ ा परिलकà¥à¤·à¤¿à¤¤ होती है जो पूरà¥à¤£ मनोवैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• है।
Full Text:
PDFCopyright (c) 2017 Edupedia Publications Pvt Ltd

This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-ShareAlike 4.0 International License.
Â
All published Articles are Open Access at  https://journals.pen2print.org/index.php/ijr/Â
Paper submission: ijr@pen2print.org
International Journal of Research