डॉ. अमà¥à¤¬à¥‡à¤¡à¤•र केवल दलितों के मसीहा नहीं : à¤à¤• विशà¥à¤²à¥‡à¤·à¤£à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨

Inderjeet Ahlawat

Abstract


भारतरतà¥à¤¨ डॉ. भीमराव अंबेडकर के विरà¥à¤¦à¥à¤§ दलितों का मसीहा होने का à¤à¤• पà¥à¤°à¤¬à¤²à¤¤à¤¾ पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£ यह पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ किया जाता है कि उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने संविघान से जाति विशेष के लोगों के लिठआरकà¥à¤·à¤£ की वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ करके समाज की अनà¥à¤¯ जातियों के साथ समाजारà¥à¤¥à¤¿à¤• भेदभाव की नींव रखी है। इनके दà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¾ की गई इस संवैधानिक वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के कारण समाज के अनà¥à¤¯ समाजारà¥à¤¥à¤¿à¤• रूप से पिछडे लोगों के साथ जाति के आधार पर सà¥à¤µà¤­à¤¾à¤µà¤¶à¥ भेदभाव हो गया है और जिनकी दशा दलितों से भी अधिक दयनीय है, वे जाति-भेद के कारण संशोधित है । आशà¥à¤šà¤°à¥à¤¯à¤œà¤¨à¤• तथा दà¥à¤–द तथà¥à¤¯ तो यह है कि अजà¥à¤œà¤¾à¤°à¤•à¥à¤·à¤£à¤•à¥à¤š विषयक संवैधानिक उपबंधों का बिना गहनतापूरà¥à¤µà¤• अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ तथा वà¥à¤¯à¤¾à¤–à¥à¤¯à¤¾ किठजो भी डॉ. अमà¥à¤¬à¥‡à¤¡à¤•र के विरà¥à¤¦à¥à¤§ लगाठगठइस निराधार आरोप को सà¥à¤¨à¤¤à¥‡ हैं, उनमें अधिकाशतः इसे सतà¥à¤¯ मानकर ततà¥à¤•à¥à¤·à¤£ सांविधान निरà¥à¤®à¤¾à¤¤à¤¾ डॉ. अमà¥à¤¬à¥‡à¤¡à¤•र के विरूदà¥à¤µ पूरà¥à¤µà¤¾à¤—à¥à¤°à¤¹à¤ªà¥‚रà¥à¤£ निराधार à¤à¤•पकà¥à¤·à¥€à¤¯ राय कायम कर उनके सपà¥à¤ªà¥‚रà¥à¤£ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ à¤à¤µ कृतितà¥à¤µ को उसी मापदणà¥à¤¡ से देखने लगते है। नतीजा यह है कि इस महामानव के वहà¥à¤¤ सरि अनमोल सà¥à¤à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ का लाभ उठाने से हम तथा हमारा समाज वंचित है । साथ ही आज भी डॉ. अमà¥à¤¬à¥‡à¤¡à¤•र को भारत में यह सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ नहीं है, जिसके वे सरà¥à¤µà¤¥à¤¾ अधिकारी हैं


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