हजारी पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤¦ दà¥à¤µà¤¿à¤µà¥‡à¤¦à¥€ के पतà¥à¤°
Abstract
हजारी पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤¦ दà¥à¤µà¤¿à¤µà¥‡à¤¦à¥€ गà¥à¤°à¤¨à¥à¤¥à¤¾à¤µà¤²à¥€ खणà¥à¤¡-2 में पà¥à¤°à¤•ाषित पतà¥à¤°à¤¾à¤µà¤²à¥€ की है शà¥à¤°à¥ƒà¤‚खला में मà¥à¤•à¥à¤¨à¥à¤¦ दà¥à¤µà¤¿à¤µà¥‡à¤¦à¥€ के संपादन में ‘पतà¥à¤° हजार पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤¦ दà¥à¤µà¤¿à¤µà¥‡à¤¦à¥€â€™ राजकमल पà¥à¤°à¤•ाषन की ओर से पà¥à¤°à¤•ाषित किया गया है। इस संगà¥à¤°à¤¹ में पà¥à¤°à¤•ाषित यदà¥à¤µà¤ªà¤¿ कà¥à¤› पतà¥à¤° गà¥à¤°à¤‚थावली के ही हैं और कà¥à¤› अनà¥à¤¯ पतà¥à¤°à¤¿à¤•ाओं में à¤à¥€ पà¥à¤°à¤•ाषित हो चà¥à¤•े हैं, तथापि इसमें कà¥à¤› अनछà¥à¤ पतà¥à¤° à¤à¥€ पà¥à¤°à¤•ाषित किये गये हैं। दà¥à¤µà¤¿à¤µà¥‡à¤¦à¥€ जी ने अपने जीवन काल में अनगिनत पतà¥à¤° लिखे होंगे, किनà¥à¤¤à¥ ‘‘सà¤à¥€ पतà¥à¤° पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ नहीं हो सके, जे à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हà¥à¤¯à¥‡ हैं उनमें से कà¥à¤› चà¥à¤¨à¥‡ हà¥à¤ पतà¥à¤° इस संगà¥à¤°à¤¹ में पà¥à¤°à¤•ाषित किये जा रहे हैं’’ पृषà¥à¤ 3 । हिनà¥à¤¦à¥€ साहितà¥à¤¯ में पतà¥à¤°à¥‹à¤‚ को अà¤à¥€ विधा के रूप में सà¥à¤µà¥€à¤•ार नहीं किया गया है। पर इतना तो जरूर हे कि पतà¥à¤° किसी वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ को समà¤à¤¨à¥‡ में जिते सहायक होत हैं, उतना कोई और माधà¥à¤¯à¤® नहीं। साहितà¥à¤¯à¤•ार अपने साहितà¥à¤¯ से हटकर अपने पतà¥à¤°à¥‹à¤‚ में ही सà¥à¤µà¤¯à¤‚ को खोल पाता है। विषेषकर अपने परिचितों, धनिषà¥à¤Ÿ मितà¥à¤°à¥‹à¤‚ और अपने संबंधियो को लिखे गये पतà¥à¤°à¥‹à¤‚ में।
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