लोकतंतà¥à¤° के दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ोण à¤à¤µà¤® विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ आयाम
Abstract
लोकतंतà¥à¤° à¤à¤• आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• आदरà¥à¤¶ है। यह à¤à¤• संगठन तथा जीवन-मारà¥à¤— है जहां वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ तथा मानवता का पूरà¥à¤£ विकास समà¥à¤à¤µ है।’’ इसके समसà¥à¤¤ समरà¥à¤¥à¤•ों ने मनà¥à¤·à¥à¤¯ और उसके अधिकार को केनà¥à¤¦à¥à¤° मान कर ही अपने विचारों का पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ किया है। इसके अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, लोकतंतà¥à¤° की अवधारणा वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤• है जिसमें इसे शासनतंतà¥à¤° के सà¥à¤µà¤°à¥‚प, राजà¥à¤¯ के रूप में à¤à¤• वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾, समाज के विशाल रूप, नैतिक पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥‚प, आरà¥à¤¥à¤¿à¤• आधारशिला, जीवन की महती परिपाटी के रूप में पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ किया गया है। यह दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ोण लोकतंतà¥à¤° को à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ शासन पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ और सामाजिक वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के सिदà¥à¤§à¤¾à¤¨à¥à¤¤ के रूप में पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ करता है जिसकी à¤à¤• विशेष पà¥à¤°à¤•ार की मनोवृतà¥à¤¤à¤¿ होती है और जिसका à¤à¤• आरà¥à¤¥à¤¿à¤• आधार होता है। यह लोकतंतà¥à¤° के राजनीतिक, सामाजिक और दैनिक वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤° के सारे सामाजिक à¤à¤µà¤‚ सांसà¥à¤•ृतिक मापदणà¥à¤¡à¥‹à¤‚ को समà¥à¤®à¤¿à¤²à¤¿à¤¤ रूप में इसकी परिà¤à¤¾à¤·à¤¾ के अनà¥à¤¦à¤° पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ करता है। इस दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ोण के मूलà¤à¥‚त ततà¥à¤µ निमà¥à¤¨à¤¾à¤‚कित हैं-
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