पण्डिता रमाबाई कालीन महिला सुधार आंदोलन (बंगाल और महाराष्ट्र के संदर्भ में)

डॉ. एकता सिंह

Abstract


उन्नीसवीं सदी को स्त्रियों की शताब्दी कहना बेहतर होगा भारत में खासतौर से बंगाल और महाराष्ट्र में समाज सुधारकों ने स्त्रियों में फैली बुराईयां पर आवाज उठाना शुरू किया। इन दोनों राज्यों से ब्रितानियों का संबंध भारत के अन्य भागों की अपेक्षा पहले बना। स्त्रियों को शिक्षित करने के महत्व पर सबसे पहली सार्वजनिक बहस राममोहन राय द्वारा 1815 में स्थापित आत्मीय सभा द्वारा बंगाल में छेड़ी गई। उसी वर्ष उन्होंने एक भारतीय भाषा (बंगाली) में सती पर हमला बोलते हुए पहला लेख लिखा। 1818 में बंगाल के तत्कालीन प्रांतीय गवर्नर विलियम बैटिक ने प्रांत में सती प्रथा पर रोक लगा दी। सारे भारत में इस निषेध को फैलाने में 11 वर्ष लगे। विलियम बैटिक 1829 में जब भारत के गवर्नर जनरल बने तो उन्होंने सती निर्मूलन एक्ट पास किया।


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