मà¥à¥šà¤² काल में शाही महिलाओ की शैकà¥à¤·à¤¿à¤• सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿

पवन कुमार

Abstract


मानव जीवन में शिकà¥à¤·à¤¾ का अधिकं महतà¥à¤µ है पॠशिकà¥à¤·à¤¾ के माधà¥à¤¯à¤® से ही मनà¥à¤·à¥à¤¯ ने अपना विकास किया पॠकालांतर से विभिनà¥à¤¨ शासक वरà¥à¤—ों ने शिकà¥à¤·à¤¾ के समà¥à¤šà¤¿à¤¤ पà¥à¤°à¤¬à¤‚ध करने शà¥à¤°à¥‚ कर दिठथे पॠपà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ काल से ही शिकà¥à¤·à¤¾ का सà¥à¤µà¤°à¥‚प राजसी और साधारण वरà¥à¤— के लिठअलग अलग रहा है पॠभारत की पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ शिकà¥à¤·à¤¾ आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤•ता पर आधारित थी। भारत शà¥à¤µà¤¿à¤¶à¥à¤µà¤—à¥à¤°à¥à¤¶à¥ कहलाता था। पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ काल में इस बात पर बल दिया गया कि शिकà¥à¤·à¤¾ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को जीवन का यथारà¥à¤¥ दरà¥à¤¶à¤¨ कराती है। तथा इस योगà¥à¤¯ बनाती है कि वह भवसागर की बाधाओं को पार करके अनà¥à¤¤ में मोकà¥à¤· को पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ कर सके जो कि मानव जीवन का चरम लकà¥à¤·à¥à¤¯ है। भारत में मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® राजà¥à¤¯ की सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ होते ही इसà¥à¤²à¤¾à¤®à¥€ शिकà¥à¤·à¤¾ का पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤° होने लगा। फारसी जाननेवाले ही सरकारी कारà¥à¤¯ के योगà¥à¤¯ समà¤à¥‡ जाने लगे। हिंदू अरबी और फारसी पढ़ने लगे। बादशाहों और अनà¥à¤¯ शासकों की वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤—त रà¥à¤šà¤¿ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° इसà¥à¤²à¤¾à¤®à¥€ आधार पर शिकà¥à¤·à¤¾ दी जाने लगी। पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ लेख में मà¥à¤—लकालीन शाही महिलाओ की शैकà¥à¤·à¤¿à¤• सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ के बारे में बताया गया है पà¥


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