बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ और सà¥à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के मानवाधिकार : सामाजिक दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ोण
Abstract
मानवाधिकार ‘वे अधिकार और सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤°à¤¤à¤¾ हैं, जिन पर सà¤à¥€ मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚ का हक है।’ इस विचारधारा के समरà¥à¤¥à¤• इस तथà¥à¤¯ पर बल देते हैं कि पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ मनà¥à¤·à¥à¤¯à¤®à¤¾à¤¤à¥à¤° होने से ही कà¥à¤› अधिकारों का हकदार हो जाता है। इस पà¥à¤°à¤•ार मानवाधिकारों की परिकलà¥à¤ªà¤¨à¤¾ सारà¥à¤µà¤à¥Œà¤®à¤¿à¤• à¤à¤µà¤‚ उदारवादी दृषà¥à¤Ÿà¤¿ से की जाती है। à¤à¤¸à¥‡ अधिकारों का असà¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤• मानवीय नैतिकता के रूप में अनà¥à¤¯ मूलà¥à¤¯à¥‹à¤‚ के साथ बना रह सकता है, जो तरà¥à¤•संगत और वैधानिक अधिकारों की दृषà¥à¤Ÿà¤¿ से राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ या अंतरराषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ कानून के सà¥à¤¤à¤° पर मानà¥à¤¯ हों। फिर à¤à¥€ इस बात पर सहमति नहीं बन सकी है कि इन उलà¥à¤²à¤¿à¤–ित अरà¥à¤¥à¥‹à¤‚ में से कौन-सा अरà¥à¤¥ विशेष रूप से सà¥à¤µà¥€à¤•ारà¥à¤¯ हो। मानवाधिकारों की अमूरà¥à¤¤ अवधारणा विचारोतà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤• दारà¥à¤¶à¤¨à¤¿à¤• विचार-विमरà¥à¤¶ à¤à¤µà¤‚ आलोचना का विषय बन गई है।
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