वी.à¤. सà¥à¤®à¤¿à¤¥ का इतिहास-दरà¥à¤¶à¤¨ और इतिहास-लेखन
Abstract
किसी à¤à¥€ इतिहासकार के इतिहास लेखन पर इतिहासकार की अपनी विचारधारा का कितना पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ पडता है। यह डॉ0 सà¥à¤®à¤¿à¤¥ के इतिहास लेखन से साफ पता चलता है। विवेचित यह इतिहासकार अति विदà¥à¤µà¤¾à¤¨, इतिहास लेखन के विकास से परिचित थे और उनकी à¤à¤¾à¤·à¤¾ शैली अति सà¥à¤—मà¥à¤¯ à¤à¤µà¤‚ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करने वाली, बड़े कैनवास पर लिखने वाले इतिहासकार हैं। डॉ. सà¥à¤®à¤¿à¤¥ ने अपने इतिहास लेखन की योजना अतà¥à¤¯à¤¨à¥à¤¤ वृहद सà¥à¤¤à¤° पर तैयार की थी। अपने समय तक के सà¤à¥€ उपलबà¥à¤§ सà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤¤à¥‹à¤‚ का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— किया। चूà¤à¤•ि वे यूरोपीय इतिहास-लेखन में à¤à¤°à¤ªà¥à¤° किया। तथà¥à¤¯à¥‹à¤‚ का संकलन उनका विशà¥à¤²à¥‡à¤·à¤£ उचà¥à¤š कोटि का है। उनका लेखन इतना परिमारà¥à¤œà¤¿à¤¤ है कि उनके गà¥à¤°à¤‚थ को पà¥à¤¤à¥‡ à¤à¤µà¤‚ अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ करते हà¥à¤ पाठक की दिलचसà¥à¤ªà¥€ बरकरार रहती है। यही कारण है कि काफी लमà¥à¤¬à¥‡ समय तक डॉ. सà¥à¤®à¤¿à¤¥ का यह गà¥à¤°à¤‚थ उचà¥à¤š कोटि की पाठà¥à¤¯à¤ªà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• बना रहा। यूरोप à¤à¤µà¤‚ à¤à¤¾à¤°à¤¤ दोनों जगहों पर इसकी लोकपà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¤à¤¾ बनी रही। इस शोध-पतà¥à¤° में डॉ. आर.सी. मजूमदार के इतिहास-दरà¥à¤¶à¤¨ और इतिहास-लेखन का अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ किया गया है।
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