कमà¥à¤ªà¤¯à¥‚टर की भाषा के लिठसंसà¥à¤•ृत भाषा के मà¥à¤¦à¥à¤¦à¥‡

डॉ रेनू श्रीवास्तव, डॉ कुंजन आचार्य

Abstract


संसà¥à¤•ृत केवल à¤à¤• भाषा मातà¥à¤° नहीं है। यह सभी भाषाओं की जननी है। संसà¥à¤•ृत भाषा भारत की आतà¥à¤®à¤¾ होने के साथ-साथ  हमारे जà¥à¤žà¤¾à¤¨ को बà¥à¤¾à¤¤à¥€ है, ये मेधा की मà¥à¤–रता है। संसà¥à¤•ृत भाषा हमारे अतीत और वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ के बीच à¤à¤• सेतॠका कारà¥à¤¯ करती है। इसीलिये इस भाषा को सबसे पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ उलà¥à¤²à¥‡à¤–ित भाषा कहा जाता हैॅ। हिनà¥à¤¦à¥‚ धरà¥à¤® के लगभग सभी गà¥à¤°à¤¨à¥à¤¥ संसà¥à¤•ृत भाषा में ही लिखे गये है। आज भी अधिकतर यजà¥à¤ž और पूजा में मतà¥à¤°à¥‹à¤‚ का उचà¥à¤šà¤¾à¤°à¤£ संसà¥à¤•ृत भाषा में ही किया जाता है। संसà¥à¤•ृत भाषा में सà¥à¤µà¤°à¥‹à¤‚ और वà¥à¤¯à¤‚जनों की संखà¥à¤¯à¤¾ रà¥à¤ªà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ होने के कारण कमà¥à¤ªà¥à¤¯à¥‚टर में धà¥à¤µà¤¨à¤¿ आधारित उपयोगों के लिठभी संसà¥à¤•ृत सरà¥à¤µà¤¶à¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤  भाषा मानी गयी है। वैसे भी संसà¥à¤•ृत को जिस देवनागरी लिपि में लिखा जाता है, वो संसार की सबसे अधिक वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• à¤à¤µà¤‚ पूरà¥à¤£ लिपि मानी जाती हैं ं। संसà¥à¤•ृत के सरà¥à¤µà¥‹à¤¤à¥à¤¤à¤® शबà¥à¤¦ विनà¥à¤¯à¤¾à¤¸ यà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿ के कारण कमà¥à¤ªà¥à¤¯à¥‚टर सà¥à¤¤à¤° पर नासा व अनà¥à¤¯ वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• व भाषाविद संसà¥à¤¥à¤¾à¤“ं ने भी इस भाषा को वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• भाषा मानते हà¥à¤¯à¥‡ इसका अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ कराया है जो कि भविषà¥à¤¯ में कमà¥à¤ªà¥à¤¯à¥‚टर भाषा के सà¥à¤¤à¤° पर à¤à¤• नयी कà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥à¤¤à¤¿ को जनà¥à¤®Â  देगी और आने वाला समय संसà¥à¤•ृत भाषा का होगा।

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