वेदों में वरà¥à¤£à¤¿à¤¤ योगविदà¥à¤¯à¤¾

डॉ राम भगत

Abstract


योगदरà¥à¤¶à¤¨ à¤à¤• बहà¥à¤¤ ही महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ और साधकों के लिठपरम-उपयोगी शासà¥à¤¤à¥à¤°à¤¾ है। इसमें अनà¥à¤¯ दरà¥à¤¶à¤¨à¥‹à¤‚ की भाटà¥à¤Ÿà¤¤à¤¿ खणà¥à¤¡à¤¨-मणà¥à¤¡à¤¨ के लिठयà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤µà¤¾à¤¦ का अवलमà¥à¤¬à¤¨ न करके, सरलतापूरà¥à¤µà¤• बहà¥à¤¤ ही कम शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ में अपने सि(ानà¥à¤¤à¥‹à¤‚ का निरूपण किया गया है। योगांग 8 बताठगठहैं - यम-नियम- आसन-पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¾à¤¯à¤¾à¤®-पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¤¾à¤¹à¤¾à¤°-धारणा- धà¥à¤¯à¤¾à¤¨-समाधि। संकà¥à¤·à¥‡à¤ª में, यह मानव से महामानव बनाने वाला दरà¥à¤¶à¤¨ है। ‘तन सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥-मन सà¥à¤µà¤šà¥à¤›, पिफर होते सारे करà¥à¤® सà¥à¤µà¤šà¥à¤›à¥¤â€™ इस पà¥à¤°à¤•ार इस गà¥à¤°à¤¨à¥à¤¥ में बहà¥à¤¤ ही थोड़े शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ में आतà¥à¤®à¤•लà¥à¤¯à¤¾à¤£ के लिठबहà¥à¤¤ ही उपयोगी और पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¤•à¥à¤· उपाय बताठगठहैं। पात×जल योगदरà¥à¤¶à¤¨ और वैदिक-साहितà¥à¤¯ हमेशा से ही समà¥à¤ªà¥‚रà¥à¤£ विशà¥à¤µ के लिठअनà¥à¤•रणीय रहे हैं। महरà¥à¤·à¤¿ दयाननà¥à¤¦ सरसà¥à¤µà¤¤à¥€ ने समसà¥à¤¤ विदà¥à¤¯à¤¾à¤“ं को सूकà¥à¤·à¥à¤®à¤°à¥‚पेण वेदों में ही निहित बताया। इसी कà¥à¤°à¤® में सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ बà¥à¤°à¤¹à¥à¤®à¤®à¥à¤¨à¤¿ परिवà¥à¤°à¤¾à¤œà¤• ने योगदरà¥à¤¶à¤¨ के मूल सि(ानà¥à¤¤à¥‹à¤‚ को भी वेदों में विदà¥à¤¯à¤®à¤¾à¤¨ बताते हà¥à¤ योगामृत-योगमारà¥à¤—-पत×जलि योग दरà¥à¤¶à¤¨ नामक कई पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤•ें लिखी।






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