कामकाजी नारीः à¤à¤• अवलोकन

डॉ सुनीता

Abstract


समाज à¤à¤• विषेश पà¥à¤°à¤•ार की वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ का नाम हैं। जिसमें पà¥à¤°à¥‚श और नारी सृशà¥à¤Ÿà¤¿ के आधार हैं। इस सृशà¥à¤Ÿà¤¿ में दोनों की सतà¥à¤¤à¤¾ समान रूप से महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ हैं। सृशà¥à¤Ÿà¤¿ ने दोनों को समान महतà¥à¤µ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ कर विभिनà¥à¤¨ गà¥à¤£à¥‹à¤‚ से यà¥à¤•à¥à¤¤ किया है। इनके अपने अलग-अलग गà¥à¤£ à¤à¤• तरफ तो इनका अलग-अलग महतà¥à¤µ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤ªà¤¾à¤¦à¤¿à¤¤ करते हैं तो दूसरी तरफ à¤à¤• दूसरे के पूरक भी बनाते हैं। à¤à¤•-दूसरे के साथ बिना ये अधूरें हैं। परनà¥à¤¤à¥ समाज विषेश की वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के अनà¥à¤°à¥‚प इनके महतà¥à¤µ को पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤ªà¤¾à¤¦à¤¿à¤¤ किया जाने लगता है। जिसके कारण इनके महतà¥à¤µ में असंतà¥à¤²à¤¨ का भाव आ जाता है। जिसका उदाहरण हम अपने भारतीय समाज का ले सकते हैं। पितृसतà¥à¤¤à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• à¤à¤µà¤‚ पà¥à¤°à¥‚श पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨ भारतीय समाज में लमà¥à¤¬à¥‡à¤‚ समय से इसी तथà¥à¤¯ के आधार पर नारी को दोयम दरà¥à¤œà¥‡ पर रखा गया। à¤à¤• लमà¥à¤¬à¥‡ समय तक नारी की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ अतà¥à¤¯à¤‚त दयनीय और दासों के समान थी। लेकिन समय के साथ-साथ आधà¥à¤¨à¤¿à¤• विचारकों का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨Â  भी इस दषा पर गया। उनà¥à¤¹à¥‹à¤¨à¥‡ नारी की इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ व दरà¥à¤¦ को महसूस किया। इस दिषा में भारतीय समाज में 19वीं सदी अतà¥à¤¯à¤‚त महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है। जब अनेकानेक समाज सà¥à¤§à¤¾à¤°à¤•ों ने नारी की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में सà¥à¤§à¤¾à¤° के लिठअनेक सà¥à¤§à¤¾à¤°à¤µà¤¾à¤¦à¥€ आनà¥à¤¦à¥‹à¤²à¤¨ चलाà¤à¥¤ जिसके परिणाम सà¥à¤µà¤°à¥‚प नारी की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में उलà¥à¤²à¥‡à¤–नीय परिवरà¥à¤¤à¤¨ हà¥à¤à¥¤ सà¥à¤µà¥€à¤§à¥€à¤¨à¤¤à¤¾ के पशà¥à¤šà¤¾à¤¤ भारतीय संविधान में भी सनॠ1956 में पारित हिनà¥à¤¦à¥‚ कोड बिल में सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€-पà¥à¤°à¥‚श समानाधिकारों की घोशणा की। कहा जा सकता है कि आधà¥à¤¨à¤¿à¤• यà¥à¤— में उनà¥à¤¨à¤¤à¤¿ और विकास की धारा में सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ नयी चेतना विकसित हà¥à¤ˆ है।

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