बिहार में दलित आंदोलन का इतिहास
Abstract
à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ संविधान दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ मानवीकृत अनà¥à¤¸à¥‚चित जाति को संबोधित करने के लिठआज दलित शबà¥à¤¦ का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— तेजी से बà¥à¤¾ है। औपनिवेशिक काल में à¤à¤¾à¤°à¤¤ के अछूतों, शोषितों तथा पीड़ित जातियों के संबोधन हेतॠैबीमकनसमक बà¥à¥‡à¤‚जम शबà¥à¤¦à¤¾à¤µà¤²à¥€ का इजाद साइमन कमीशन दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ किया गया था जिसे पहले इंडिया à¤à¤•à¥à¤Ÿ 1935 तथा बाद में à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯Â संविधान ने अंगीकृत कर लिया। ैबीमकनसमक बà¥à¥‡à¤‚जम शबà¥à¤¦à¤¾à¤µà¤²à¥€ का हिनà¥à¤¦à¥€ रूपांतरण अनà¥à¤¸à¥‚चित जाति है। वैदिक काल से लेकर समà¥à¤ªà¥‚रà¥à¤£ परतंतà¥à¤° à¤à¤¾à¤°à¤¤ में इन जातियों पर अनेक पà¥à¤°à¤•ार के सामाजिक, धारà¥à¤®à¤¿à¤• तथा राजनैतिक पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¬à¤‚ध हà¥à¤ थे। तलब à¤à¥‚षण, पी॰à¤à¤¸à¥° अयà¥à¤¯à¤°, बी॰à¤à¤®à¥° महाजन, के॰सी॰ अयà¥à¤¯à¤°, बालकृषà¥à¤£, जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿à¤¬à¤¾ फूले, बी॰आर॰ à¤à¤¿à¤¨à¥à¤¡à¥‡ तथा à¤à¤£à¥à¤¡à¤¾à¤°à¤•र जैसे समाज सà¥à¤§à¤¾à¤°à¤•ों ने उनकी सामाजिक सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ को ऊपर उठाने तथा उनके ऊपर लगी अयोगà¥à¤¯ वाली को दूर करने के लिठकाफी पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ किया। किनà¥à¤¤à¥ बीसवीं सदी के पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤®à¥à¤ में à¤à¤¾à¤°à¤¤ में दलितों की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ काफी दयनीय बनी रही। समाज के विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में अमूलà¥à¤¯ योगदान रहते हà¥à¤ à¤à¥€ वे हिनà¥à¤¦à¥‚ओं के लिठअसà¥à¤ªà¥ƒà¤¶à¥à¤¯ ही बने रहे।
Copyright (c) 2018 Edupedia Publications Pvt Ltd

This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-ShareAlike 4.0 International License.
Â
All published Articles are Open Access at  https://journals.pen2print.org/index.php/ijr/Â
Paper submission: ijr@pen2print.org
International Journal of Research