गांवों की आरà¥à¤¥à¤¿à¤• à¤à¤µà¤‚ सामाजिक चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚रू à¤à¤• संकà¥à¤·à¤¿à¤ªà¥à¤¤ अवलोकन

डॉ. केशरी नन्दन मिश्रा

Abstract


महातà¥à¤®à¤¾ गांधी ने कहा था कि, ’’भारत की आतà¥à¤®à¤¾ गांवों में बसती है।’’ गांवों को आरà¥à¤¥à¤¿à¤• à¤à¤µà¤‚ सामाजिक रूप से सà¥à¤¦à¥ƒà¥ बनाना अतà¥à¤¯à¤¨à¥à¤¤ आवशà¥à¤¯à¤• है, जिसके लिये विदà¥à¤¯à¥à¤¤à¥€à¤•रण भी पà¥à¤°à¤®à¥à¤– भूमिका के रूप में दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤—त होता है। भारत में विदà¥à¤¯à¥à¤¤ का विकास 19वीं सदी के अनà¥à¤¤ में शà¥à¤°à¥‚ हà¥à¤†, जिसकी मà¥à¤–à¥à¤¯à¤§à¤¾à¤°à¤¾ में शहरी कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ को समà¥à¤®à¤¿à¤²à¤¿à¤¤ किया गया और गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥€à¤£ पृषà¥à¤ à¤­à¥‚मि विदà¥à¤¯à¥à¤¤ के विकास में सà¥à¤¦à¥‚र करने की कवायद की जा रही है। यह तभी समà¥à¤­à¤µ है जब सभी परियोजनाओं को सकारातà¥à¤®à¤• à¤à¤µà¤‚ सतत रूप से लागू किया जाà¤à¥¤ ततà¥à¤ªà¤¶à¥à¤šà¤¾à¤¤ ही बà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾à¤¦à¥€ घरेलू विदà¥à¤¯à¥à¤¤à¥€à¤•रण की मांग को पूरा किया जा सकता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि जब होंगे गांव रोशन, तब होगा भारत रोशलन...


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