सिनà¥à¤§à¥ घाटी की सà¤à¥à¤¯à¤¤à¤¾- à¤à¤• à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• विशà¥à¤²à¥‡à¤·à¤£
Abstract
सिनà¥à¤§à¥ घाटी की सà¤à¥à¤¯à¤¤à¤¾ à¤à¤¾à¤°à¤¤ की à¤à¤¸à¥€ पà¥à¤°à¤¥à¤® जà¥à¤žà¤¾à¤¤ सà¤à¥à¤¯à¤¤à¤¾ है जिसके बारे में कà¥à¤› निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ जानकारी अवशà¥à¤¯ मिलती है। इसके पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£ 1922-23 में à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ पà¥à¤°à¤¾à¤¤à¤¤à¥à¤µ विà¤à¤¾à¤— दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ शà¥à¤°à¥€ राखलदास बैनरà¥à¤œà¥€ की अधà¥à¤¯à¤•à¥à¤·à¤¤à¤¾ में करवाई गई खà¥à¤¦à¤¾à¤ˆ से पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हà¥à¤ हैं। सिंध के लरकाना जिले में मोहनजोदड़ो नामक नगर तथा पंजाब के मांटगोमरी जिले में दयाराम साहनी के नेतृतà¥à¤µ में करवाई गई खà¥à¤¦à¤¾à¤ˆ से हड़पà¥à¤ªà¤¾ नगर के अवशेष पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हà¥à¤ हैं, जिनसे पता चलता है कि ये दोनों नगर à¤à¤• ही सà¤à¥à¤¯à¤¤à¤¾ से समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§à¤¿à¤¤ हैं। जैसे-जैसे खà¥à¤¦à¤¾à¤ˆ का कारà¥à¤¯ आगे बढाया गया तो इस सà¤à¥à¤¯à¤¤à¤¾ के विसà¥à¤¤à¥ƒà¤¤ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° का पता चला तथा इसे इराक की सà¤à¥à¤¯à¤¤à¤¾à¤“ं के समकालीन माना गया। चूंकि इस सà¤à¥à¤¯à¤¤à¤¾ के अवशेष सबसे पहले सिनà¥à¤§à¥ नदी की घाटी में पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हà¥à¤ हैं, इसलिठइसे सिनà¥à¤§à¥ घाटी की सà¤à¥à¤¯à¤¤à¤¾ कहा जाता है। पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ शोध पतà¥à¤° में दà¥à¤µà¤¿à¤¤à¥€à¤¯à¤• आंकड़ों के आधार पर इस सà¤à¥à¤¯à¤¤à¤¾ का à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• विशà¥à¤²à¥‡à¤·à¤£ किया गया है।
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