à¤à¤¾à¤°à¤¤ में जैन धरà¥à¤® का उदà¥à¤à¤µ, विकास à¤à¤µà¤‚ पतन
Abstract
वसà¥à¤¤à¥à¤¤à¤ƒ à¤à¤¾à¤°à¤¤ में छठी शताबà¥à¤¦à¥€ ई0पू0 में जैन धरà¥à¤® का उदà¥à¤à¤µ होना धारà¥à¤®à¤¿à¤• कà¥à¤°à¤¾à¤‚ति की शà¥à¤°à¥‚आत माना जाता है। यह समय समà¥à¤ªà¥‚रà¥à¤£ विशà¥à¤µ में बौदà¥à¤§à¤¿à¤• जागरण तथा आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• अशांति का यà¥à¤— था। इस समय à¤à¤¾à¤°à¤¤ में बà¥à¤°à¤¾à¤¹à¥à¤®à¤£ धरà¥à¤® की जटिलता के कारण धारà¥à¤®à¤¿à¤• करà¥à¤®à¤•ांड और यजà¥à¤ž काफी महंगे हो गठथे तथा धरà¥à¤® का सà¥à¤µà¤°à¥‚प बिगड़ गया था। à¤à¤¸à¥‡ समय में सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ महावीर ने जैन धरà¥à¤® के रूप में à¤à¤• सरल धरà¥à¤® जनता के सामने पेश किया जो आगे चलकर शà¥à¤µà¥‡à¤¤à¤¾à¤®à¥à¤¬à¤° तथा दिगमà¥à¤¬à¤° में बंट गया। जैन धरà¥à¤® में à¤à¥€ जैन संघों का काफी महतà¥à¤µ है। इसमें महिलाओं को à¤à¥€ पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ का अधिकार दिया गया लेकिन इस धरà¥à¤® की यह विडमà¥à¤¬à¤¨à¤¾ रही कि सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ महावीर की मृतà¥à¤¯à¥ के बाद यह धरà¥à¤® धीरे-धीरे पतन के मारà¥à¤— पर चल पड़ा। फिर à¤à¥€ इस धरà¥à¤® ने à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ सà¤à¥à¤¯à¤¤à¤¾ और संसà¥à¤•ृति को काफी पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ किया तथा जैन साहितà¥à¤¯ के रूप में à¤à¤• समृदà¥à¤§ विरासत à¤à¤¾à¤°à¤¤ में मौजूद है और जैन मनà¥à¤¦à¤¿à¤° समृदà¥à¤§ सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¤à¥à¤¯ कला का अनूठा नमूना है। पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ शोध पतà¥à¤° में à¤à¤¾à¤°à¤¤ में जैन धरà¥à¤® के उदà¥à¤à¤µ, विकास à¤à¤µà¤‚ पतन का विशà¥à¤²à¥‡à¤·à¤£ किया गया है।
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