हूण वंश दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ इतिहास में शैव धरà¥à¤® पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤° व बौदà¥à¤§ धरà¥à¤® के विधà¥à¤µà¤‚श का पà¥à¤°à¤¾à¤¥à¤®à¤¿à¤• सà¥à¤°à¥‹à¤¤à¥‹à¤‚ के आधार पर à¤à¤• विशà¥à¤²à¥‡à¤·à¤£
Abstract
à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ इतिहास में पांचवी शताबà¥à¤¦à¥€ हूण शासन के लिठखà¥à¤¯à¤¾à¤¤ है। विशेषकर तोरमाण और मिहिरकà¥à¤² की कीरà¥à¤¤à¤¿ से à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ इतिहास जà¥à¤µà¤²à¤‚त है। हूण गंधार, सिधà¥, मारवाड़, पशà¥à¤šà¤¿à¤®à¥€ राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨, मालवा पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶à¥‹à¤‚ पर अपना आधिपतà¥à¤¯ सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ करने में सफल रहे थे। हूण शासन का सबसे महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£ है मधà¥à¤¯à¤ªà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ के सागर में मिले वाराह मूरà¥à¤¤à¤¿ पर अंकित तोरमाण के अà¤à¤¿à¤²à¥‡à¤–। जैन गà¥à¤°à¤‚थों में à¤à¥€ हूण शासन के केंदà¥à¤° के रूप में चंदà¥à¤°à¤à¤¾à¤—ा नदी के किनारे सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ पवैयà¥à¤¯à¤¾ नगरी को बताया गया है । संà¤à¤µà¤¤à¤ƒ यह पवैयà¥à¤¯à¤¾ नगरी वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ मधà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ में गà¥à¤µà¤¾à¤²à¤¿à¤¯à¤° के पास सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ थी। इस शोधपतà¥à¤° में मैंने हूण वंश दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ à¤à¤¾à¤°à¤¤ में शैव धरà¥à¤® के पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° तथा बौदà¥à¤§ शरà¥à¤® के विनाश से समà¥à¤¬à¤‚धित इतिहास में पà¥à¤°à¤›à¤¨à¥à¤¨ पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£à¥‹à¤‚ को पà¥à¤°à¤•ाशित व विशà¥à¤²à¥‡à¤·à¤¿à¤¤ करने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ किया है जिनका à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ इतिहास के राजनैतिक व धारà¥à¤®à¤¿à¤• विकास में अà¤à¥‚तपूरà¥à¤µ महतà¥à¤µ है।
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