इतिहास में कांसà¥à¤¯ कला के विकास का à¤à¤• विशà¥à¤²à¥‡à¤·à¤£

अमित कुमार सिंह, Ms. निशा

Abstract


विशà¥à¤µ का इतिहास धातà¥à¤“ं के विकास से पà¥à¤°à¤­à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ रहा है। धातॠके पहले मनà¥à¤·à¥à¤¯ ने अपनी सृजनातà¥à¤®à¤•ता का परिचय पतà¥à¤¥à¤°à¥‹à¤‚ को तकनीकि आकार पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करके दिया है। आज से लगभग पचà¥à¤šà¥€à¤¸ लाख साल पहले मनà¥à¤·à¥à¤¯à¤¤à¤¾ ने जिस पहले यंतà¥à¤° को जनà¥à¤® दिया वह पतà¥à¤¥à¤° से निरà¥à¤®à¤¿à¤¤ था। इस पतà¥à¤¤à¥à¤¥à¤° के ऊपर ही इसे नाम दिया गया पाषाण काल। पाषाण काल इतना बड़ा काल था की बाद में जॉन लà¥à¤¬à¤¾à¤• ने इसे तीन भागों में विभाजित कर दिया। यह विभाजन मानव के विकास के तीन अलग भागों को दरà¥à¤¶à¤¾à¤¤à¤¾ है। पतà¥à¤¥à¤°à¥‹à¤‚ के बाद धातà¥à¤“ं का आविषà¥à¤•ार होता है और पाषाण काल का नाम तामà¥à¤°-पाषाण काल हो जाता है। पहली धातॠतामà¥à¤¬à¤¾ थी और दूसरी धातॠकांसा बनी। इसका आविषà¥à¤•ार तामà¥à¤¬à¥‡ में टिन मिला कर किया गया। इस शोध पतà¥à¤° में मेरा पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ है इतिहास में कांसे के विकास को वैशà¥à¤µà¤¿à¤• सà¥à¤¤à¤° पर विशà¥à¤²à¥‡à¤·à¤¿à¤¤ करना। कांसे का विकास अनिवारà¥à¤¯à¤¤à¤ƒ मानवता में तकनीकी का विकास है।


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