जायसी कृत ‘पद्मावत’ महाकाव्य की ऐतिहासिकता

वरिन्दरजीत कौर

Abstract


सूफी प्रेमाख्यानक काव्य परम्परा में मलिक मोहम्मद जायसी सर्वप्रमुख स्थान रखते हैं। उनके द्वारा रचित महाकाव्य ‘पद्मावत’ सूफी काव्य धारा का प्रतिनिधि ग्रंथ है। जिसमें चितौड़ के राजा रत्नसेन एवं सिंहलद्वीप की राजकुमारी पद्मावती के प्रेम का वर्णन है। अवधी भाषा में रचित इस ग्रंथ में जायसी कल्पना और इतिहास का अद्भुत सुमेल किया है।
भूमिका
हिन्दी साहित्य में प्रेमाख्यानक काव्य सूफियों की देन है। सूफी कवियों ने हिन्दू घरों में प्रचलित प्रेम कथाओं को आधार बनाकर ग्रंथ लिखे जो हिन्दुओं और मुसलमानों में सद्भावना कायम करने का एक सार्थक प्रयास भी था। सूफी काव्य के केन्द्र में प्रेम तत्व की प्रधानता है। इसमें लौकिक प्रेम के माध्यम से अलौकिक प्रेम की व्यंजना है अर्थात् इश्क मजाजी से इश्क हकीकी तक पहुंचने की कोशिश है। जायसी जैसे सूफी कवियों ने अपने काव्य ग्रंथों में प्रचलित लोक कथाओं व प्रेम कथाओं के नायक-नायिका के साथ-साथ इतिहास प्रसिद्ध चरित्रों को भी लिया है।


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