à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ अनà¥à¤¦à¥‹à¤²à¤¨ और शà¥à¤°à¥€ गà¥à¤°à¥‚ नानक देव जी
Abstract
à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ अनà¥à¤¦à¥‹à¤²à¤¨ का समय à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ इतिहास में 13 वी-14 वी ईसवी माना जाता है । हिनà¥à¤¦à¥‚ धरà¥à¤® के विकास में इस आनà¥à¤¦à¥‹à¤²à¤¨ का महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ योगदान माना जाता है। यह वही समय था जब à¤à¤¾à¤°à¤¤Â के उचà¥à¤š कोटि के सनà¥à¤¤ मानव और मानवता को धरà¥à¤® का केनà¥à¤¦à¥à¤° मान कर केवल à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ के माधà¥à¤¯à¤® से ईशà¥à¤µà¤° को पाने पर जोर देते थे। इसी समय पंजाब मे गà¥à¤°à¥‚ नानक देव जी का समय मिलता है। उनके धारà¥à¤®à¤¿à¤• विचार लोगो को सरल और मानवता वादी लगे। इस शोध पतà¥à¤° के दà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¾ मै à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿Â आनà¥à¤¦à¥‹à¤²à¤¨ के मà¥à¤–à¥à¤¯ सिदà¥à¤§à¤¾à¤‚तो को गà¥à¤°à¥‚ नानक देव जी दà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¾ दिये गठउपदेशो से जोडकर यह समà¤à¤¾à¤¨à¥‡ का पà¥à¤°à¤¯à¤¤à¥à¤¨ करूॅगी कि वो à¤à¥€ à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ आनà¥à¤¦à¥‹à¤²à¤¨ के ही महान सनà¥à¤¤ थे और उनके विचार इस आनà¥à¤¦à¥‹à¤²à¤¨ से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤Â थे।
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