भारतीय संसà¥à¤•ृति में संचित मानव मूलà¥à¤¯ à¤à¤µà¤‚ चरितà¥à¤° निरà¥à¤®à¤¾à¤£ में इन मानव मूलà¥à¤¯à¥‹à¤‚ की भूमिका

प्रतिमा तिवारी

Abstract


भारतीय संसà¥à¤•ृति विशà¥à¤µ की पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨à¤¤à¤® संसà¥à¤•ृतियों में से à¤à¤• है। भारतीय संसà¥à¤•ृति मूलà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨ वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤° की पोषक है। भारतीय संसà¥à¤•ृति में मानव मूलà¥à¤¯à¥‹à¤‚ को विशेष महतà¥à¤µ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ किया गया है। मानव मूलà¥à¤¯à¥‹à¤‚ को चारितà¥à¤°à¤¿à¤• विशेषताओं के रूप में संदरà¥à¤­à¤¿à¤¤ किया गया है। मानव मूलà¥à¤¯ मानव को पशà¥à¤¤à¤¾ से भिनà¥à¤¨ रूप में पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¿à¤¤ करते हैं, जिसके अनà¥à¤¤à¤°à¥à¤—त सतà¥à¤¯, सदाचार, अहिंसा, परोपकार, दया, कà¥à¤·à¤®à¤¾ और करà¥à¤¤à¤µà¥à¤¯à¤¨à¤¿à¤·à¥à¤ à¤¾ आदि मानवीय मूलà¥à¤¯ अतà¥à¤¯à¤¨à¥à¤¤ ही विशिषà¥à¤Ÿ à¤à¤µà¤‚ मानवता के पोषक ततà¥à¤µ हैं। मानव मूलà¥à¤¯ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ à¤à¤µà¤‚ चारितà¥à¤°à¤¿à¤• गà¥à¤£à¥‹à¤‚ के दà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤• हैं। मानव मूलà¥à¤¯ की अवधारणा वेद, पà¥à¤°à¤¾à¤£, जैन धरà¥à¤®, बौदà¥à¤§ धरà¥à¤® सदैव पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ दिखाई पड़ते हैं।


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