कà¥à¤› असल है कà¥à¤› ख़à¥à¤µà¤¾à¤¬ है, कà¥à¤› तरà¥à¤œà¥‡à¤¼à¤…दा है
Abstract
नासिरा शरà¥à¤®à¤¾ के उपनà¥à¤¯à¤¾à¤¸ पारिजात में रिशà¥à¤¤à¥‡-नाते, इंसानियत, उलà¤à¤¨à¥‡à¤‚, मातम और जीवन सब कà¥à¤› पूरी रवानगी से मौजूद है। इसके अंतरà¥à¤—त महज मनà¥à¤·à¥à¤¯à¤¤à¤¾ को ही केनà¥à¤¦à¥à¤° में न रखकर मनà¥à¤·à¥à¤¯ के वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ à¤à¤µà¤‚ असà¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ को केनà¥à¤¦à¥à¤° में रखने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ किया गया है। पारिजात शबà¥à¤¦ यहाठसà¥à¤•ून के दà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤• के रूप में दिखाई पड़ता है। जिसकी उपनà¥à¤¯à¤¾à¤¸ के लगà¤à¤— हर पातà¥à¤° को तलाश है। इस उपनà¥à¤¯à¤¾à¤¸ की खासियत यह à¤à¥€ है कि इसमें जीवन और अनà¥à¤à¤µ जगत के रेशों को इतनी खूबसूरती से खोला गया है कि दो पीà¥à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का अंतराल अपने फासलों को कम करने में सकà¥à¤·à¤® दिखाई पड़ता है। हर जगह पà¥à¤°à¥‡à¤® का तà¥à¤°à¤¿à¤•ोणातà¥à¤®à¤• संबंध कहीं पाठक के समकà¥à¤· सवाल खड़े करता है तथा धरà¥à¤® à¤à¤µà¤‚ जाति का पूरा इनसाइकà¥à¤²à¥‹à¤ªà¥€à¤¡à¤¿à¤¯à¤¾ पाठक के कई सवालों का जवाब बन कर जेहन की खिड़कियों को à¤à¥€ खोल देता है।
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