आदिकवि के रà¥à¤ª में पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ महरà¥à¤·à¤¿ वालà¥à¤®à¥€à¤•ि
Abstract
वालà¥à¤®à¥€à¤•ि को पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ वैदिक काल के महान ऋषियों कि शà¥à¤°à¥‡à¤£à¥€ में पà¥à¤°à¤®à¥à¤– सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ है। वह संसà¥à¤•ृत à¤à¤¾à¤·à¤¾ के आदि कवि और आदि कावà¥à¤¯ 'रामायण' के रचयिता के रूप में पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ हैं। वालà¥à¤®à¥€à¤•ि का जनà¥à¤® नागा पà¥à¤°à¤œà¤¾à¤¤à¤¿ में हà¥à¤† था। महरà¥à¤·à¤¿ बनने के पहले वालà¥à¤®à¥€à¤•ि रतà¥à¤¨à¤¾à¤•र के नाम से जाने जाते थे। वे परिवार के पालन-पोषण हेतॠदसà¥à¤¯à¥à¤•रà¥à¤® करते थे। à¤à¤• बार उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ निरà¥à¤œà¤¨ वन में नारद मà¥à¤¨à¤¿ मिले। जब रतà¥à¤¨à¤¾à¤•र ने उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ लूटना चाहा, तो उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने रतà¥à¤¨à¤¾à¤•र से पूछा कि यह कारà¥à¤¯ किसलिठकरते हो, रतà¥à¤¨à¤¾à¤•र ने जवाब दिया परिवार को पालने के लिये। नारद ने पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨ किया कि कà¥à¤¯à¤¾ इस कारà¥à¤¯ के फलसà¥à¤µà¤°à¥à¤ª जो पाप तà¥à¤®à¥à¤¹à¥‡à¤‚ होगा उसका दणà¥à¤¡ à¤à¥à¤—तने में तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ परिवार वाले तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¤¾ साथ देंगे। रतà¥à¤¨à¤¾à¤•र ने जवाब दिया पता नहीं, नारदमà¥à¤¨à¤¿ ने कहा कि जाओ उनसे पूछ आओ। तब रतà¥à¤¨à¤¾à¤•र ने नारद ऋषि को पेड़ से बाà¤à¤§ दिया तथा घर जाकर पतà¥à¤¨à¥€ तथा अनà¥à¤¯ परिवार वालों से पूछा कि कà¥à¤¯à¤¾ दसà¥à¤¯à¥à¤•रà¥à¤® के फलसà¥à¤µà¤°à¥à¤ª होने वाले पाप के दणà¥à¤¡ में तà¥à¤® मेरा साथ दोगे तो सबने मना कर दिया। तब रतà¥à¤¨à¤¾à¤•र नारदमà¥à¤¨à¤¿ के पास लौटे तथा उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ यह बात बतायी। इस पर नारदमà¥à¤¨à¤¿ ने कहा कि हे रतà¥à¤¨à¤¾à¤•र यदि तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ घरवाले इसके पाप में तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ à¤à¤¾à¤—ीदार नहीं बनना चाहते तो फिर कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ उनके लिये यह पाप करते हो। यह सà¥à¤¨à¤•र रतà¥à¤¨à¤¾à¤•र को दसà¥à¤¯à¥à¤•रà¥à¤® से उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ विरकà¥à¤¤à¤¿ हो गई तथा उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने नारदमà¥à¤¨à¤¿ से उदà¥à¤§à¤¾à¤° का उपाय पूछा। नारदमà¥à¤¨à¤¿ ने उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ राम-राम जपने का निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶ दिया।
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