चैतनà¥à¤¯ महापà¥à¤°à¤­à¥ और चैतनà¥à¤¯ संपà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¯; à¤à¤• परिचय

रेखा मनोचा

Abstract


भकà¥à¤¤à¤¿ के पà¥à¤°à¤–à¥à¤¯à¤¾à¤¤ आचारà¥à¤¯ शà¥à¤°à¥€ चैतनà¥à¤¯ महापà¥à¤°à¤­à¥ के वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ में पà¥à¤°à¤¬à¤² आकरà¥à¤·à¤£ और उनके नेतृतà¥à¤µ में विलकà¥à¤·à¤£ समà¥à¤®à¥‹à¤¹à¤¨ होने पर भी शà¥à¤°à¥€ चैतनà¥à¤¯ ने अपने नाम से किसी मत, पंथ या संपà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¯ का पà¥à¤°à¤µà¤°à¥à¤¤à¤¨ नहीं किया। शà¥à¤°à¥€ चैतनà¥à¤¯ का जीवन à¤à¤• धरà¥à¤® परायण भकà¥à¤¤ का जीवन है। गया धाम से लौटने के बाद उनके चारों ओर जो शिषà¥à¤¯ मंडली à¤à¤•तà¥à¤°à¤¿à¤¤ हो गई थी, वह अनायास ही थी। वसà¥à¤¤à¥à¤¤à¤ƒ चैतनà¥à¤¯ संपà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¯ का पà¥à¤°à¤µà¤°à¥à¤¤à¤¨ तो उनके शिषà¥à¤¯à¥‹à¤‚ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ ही हà¥à¤† है। जिसमें विशेष रूप से वृंदावन के षडॠगोसà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€à¤ƒ सनातन, रूप, जीव, रघà¥à¤¨à¤¾à¤¥ भटà¥à¤Ÿ, रघà¥à¤¨à¤¾à¤¥ दास और गोपाल भटà¥à¤Ÿ अपनी विदà¥à¤µà¤¤à¤¾ के कारण अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ हैं। इनकी शिकà¥à¤·à¤¾ को षडॠगोसà¥à¤µà¤¾à¤®à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ ने ही शासà¥à¤¤à¥à¤°à¥€à¤¯ रूप दिया। इन षडॠगोसà¥à¤µà¤¾à¤®à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में शà¥à¤°à¥€ रूप गोसà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ सबसे महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है। शà¥à¤°à¥€ रूप गोसà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ को शà¥à¤°à¥€ चैतनà¥à¤¯ महापà¥à¤°à¤­à¥ के भकà¥à¤¤à¤¿ रस सिदà¥à¤§à¤¾à¤‚त की साकà¥à¤·à¤¾à¤¤ मूरà¥à¤¤à¤¿ माना गया है।

Full Text:

PDF




Copyright (c) 2018 Edupedia Publications Pvt Ltd

Creative Commons License
This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-ShareAlike 4.0 International License.

 

All published Articles are Open Access at  https://journals.pen2print.org/index.php/ijr/ 


Paper submission: ijr@pen2print.org