भारत में मानवाधिकारों व सामाजिक नà¥à¤¯à¤¾à¤¯ की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ : दलितों के सनà¥à¤¦à¤°à¥à¤­ में à¤à¤• विशà¥à¤²à¥‡à¤·à¤£à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨

डॉ. लक्ष्मी नारायण

Abstract


मानवाधिकार व सामाजिक नà¥à¤¯à¤¾à¤¯ à¤à¤• सभà¥à¤¯ समाज की आधारशिला है। यह सामाजिक व राजनीतिक जीवन की अनिवारà¥à¤¯ आवशà¥à¤¯à¤•ताआें में से à¤à¤• है। वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ अपने वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ का पूरà¥à¤£ विकास तब तक नहीं कर पाता जब तक कि उसे मानवाधिकारों की पूरà¥à¤£ व समान उपलबà¥à¤§à¤¤à¤¾ न हो। राजनीतिक वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ चाहे किसी पà¥à¤°à¤•ार की हो, राजà¥à¤¯ का सरà¥à¤µà¥‹à¤¤à¥à¤¤à¤® लकà¥à¤·à¥à¤¯ अपने-अपने नागरिकों के मानवाधिकारों का संरकà¥à¤·à¤£ करना है। लोकतांतà¥à¤°à¤¿à¤• शासन वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में तो यह अतà¥à¤¯à¤¨à¥à¤¤ अनिवारà¥à¤¯ है। इसी के मदà¥à¤¦à¥‡à¤¨à¤œà¤° भारत में भी पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ काल से ही जब राजतंतà¥à¤°à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ थी, मानवाधिकार किसी न किसी रूप में अवशà¥à¤¯ उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤ थे पर यह सभी वरà¥à¤—ों को समान रूप से उपलबà¥à¤§ नहीं थे।

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