उतà¥à¤¤à¤°-वैदिक काल में राजनीति à¤à¤µà¤‚ समाज

Dr. Rakesh Kumar

Abstract


वसà¥à¤¤à¥à¤¤à¤ƒ पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ भारतीय इतिहास का अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ करने के बाद उपलबà¥à¤§ हिनà¥à¤¦à¥‚ धरà¥à¤® गà¥à¤°à¤¨à¥à¤¥à¥‹à¤‚ के आधार पर मिलने वाली जानकारी से पता चलता है कि लगभग 1000 से 600ई पूरà¥à¤µ भारत में जिस सभà¥à¤¯à¤¤à¤¾ का विकास हà¥à¤†, उसे उतà¥à¤¤à¤° वैदिक सभà¥à¤¯à¤¤à¤¾ के नाम से जाना जाता है। पंजाब, हरियाणा, राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ और पशà¥à¤šà¤¿à¤® उतरपà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ से पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हà¥à¤ मिटà¥à¤Ÿà¥€ के बरà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ के अवशेष संभवतः इसी सभà¥à¤¯à¤¤à¤¾ के हैं। इसके अतिरिकà¥à¤¤ हसà¥à¤¤à¤¿à¤¨à¤¾à¤ªà¥à¤°, आलमगीर तथा बटेसर आदि सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ पर पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ लोहे के असà¥à¤¤à¥à¤°-शसà¥à¤¤à¥à¤° तथा घरेलू वसà¥à¤¤à¥à¤“ं के अवशेष भी इसी यà¥à¤— के माने जाते हैं। इस यà¥à¤— में शासन की मà¥à¤–à¥à¤¯ वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ राजतंतà¥à¤°à¥€à¤¯ रही थी। सामाजिक वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में बà¥à¤°à¤¾à¤¹à¥à¤®à¤£à¥‹à¤‚ और कà¥à¤·à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ शà¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤  थी। आरà¥à¤¥à¤¿à¤• कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में पà¥à¤°à¤—ति होने के कारण भी बड़े-बड़े नगरों का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ हो चà¥à¤•ा था। इसके साथ-साथ इस यà¥à¤— मे धरà¥à¤® और दरà¥à¤¶à¤¨ के कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में भी महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ पà¥à¤°à¤—ति हà¥à¤ˆà¥¤ पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ शोध पतà¥à¤° में उतर वैदिक काल की राजनीति à¤à¤µà¤‚ समाज के बारे में à¤à¤• à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• विशà¥à¤²à¥‡à¤·à¤£ पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ किया गया है।


Full Text:

PDF




Copyright (c) 2018 Edupedia Publications Pvt Ltd

Creative Commons License
This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-ShareAlike 4.0 International License.

 

All published Articles are Open Access at  https://journals.pen2print.org/index.php/ijr/ 


Paper submission: ijr@pen2print.org