यषपाल के उपनà¥à¤¯à¤¾à¤¸ ‘à¤à¥‚ठा सच’ में - विभाजन तà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¦à¥€

Ms. अन्नु

Abstract


विभाजन से तातà¥à¤ªà¤°à¥à¤¯ है - टà¥à¤•ड़ों में बाà¤à¤Ÿà¤¨à¤¾à¥¤ भारत के इतिहास में विभाजन अभूतपूरà¥à¤µ घटना है। परनà¥à¤¤à¥ आषà¥à¤šà¤°à¥à¤¯ की बात है कि इस विभाजन की पृशà¥à¤ à¤­à¥‚मि में न कोई पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक पà¥à¤°à¤•ोप था, न कोई भू-गरà¥à¤­ की हलचल, जो सà¥à¤¥à¤² को विभाजीत करती, न कोई बाहरी आकà¥à¤°à¤®à¤£ और न ही कोई गृहयà¥à¤¦à¥à¤§ या पूंजी बाजार की असà¥à¤¥à¤¿à¤°à¤¤à¤¾à¥¤ पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¤•à¥à¤· रूप से यह करोड़ो मनà¥à¤¶à¥à¤¯à¥‹à¤‚ का संवैधानिक रूप से अपना पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¨à¤¿à¤§à¤¿à¤¤à¥à¤µ करने वाले नेताओं के माधà¥à¤¯à¤® से सà¥à¤µà¥‡à¤šà¥à¤›à¤¾ से लिया गया निरà¥à¤£à¤¯ है। यह निरà¥à¤£à¤¯ देष के इतिहास और सभà¥à¤¯à¤¤à¤¾ के सनà¥à¤¦à¤°à¥à¤­ में लगभग उतना ही महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है और उसी पà¥à¤°à¤•ृति के काल को खणà¥à¤¡à¤¿à¤¤ करने वाला निरà¥à¤£à¤¯ था, जहां से सभà¥à¤¯à¤¤à¤¾à¤à¤‚ और समाज या तो आतà¥à¤®à¤¹à¤¤à¥à¤¯à¤¾ की ओर मà¥à¥œ जाता या फिर धीरे - धीरे आतà¥à¤®à¤µà¤¿à¤¨à¤¾à¤· की ओर।


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