मधà¥à¤¯à¤•ालीन भकà¥à¤¤à¤¿ संतो में तà¥à¤²à¤¸à¥€à¤¦à¤¾à¤¸

पवन कुमार

Abstract


भकà¥à¤¤à¤¿ पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ काल से ही मानव जीवन का à¤à¤• अंग रही है पॠपà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ काल से हमे साहितà¥à¤¯à¤¿à¤• à¤à¤µà¤‚  पà¥à¤°à¤¾à¤¤à¤¾à¤¤à¥à¤µà¤¿à¤• दोनों तरह के साकà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚ से मनà¥à¤·à¥à¤¯ की  भकà¥à¤¤à¤¿ भावना  के बारे में पता चलता है पॠसमय अंतराल पर भकà¥à¤¤à¤¿ का सà¥à¤µà¤°à¥‚प भी बदलता चला गया पॠदकà¥à¤·à¤¿à¤£ भारत में आळà¥à¤µà¤¾à¤° और नयनार संतो दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ भकà¥à¤¤à¤¿ की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ किये जाने से भकà¥à¤¤à¤¿ की धारा तेजी से बही जिसमे अनेक संतो ने अपने अपने ईषà¥à¤Ÿ देव की आराधना में भकà¥à¤¤à¤¿ का पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° करना शà¥à¤°à¥‚ कर दिया थापॠइस समय ; मधà¥à¤¯à¤•ालदà¥à¤§ में संतो ने राम और कृषà¥à¤£ की भकà¥à¤¤à¤¿ का पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤° करना शà¥à¤°à¥‚ कर दिया था पॠइन राम भकà¥à¤¤ संतो में अनेक à¤à¤¸à¥‡ संत हà¥à¤ है जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने भगवानॠराम को सगà¥à¤¨ à¤à¤µà¤‚ निरà¥à¤—à¥à¤£ रूप में अपनी भकà¥à¤¤à¤¿ का माधà¥à¤¯à¤® बनाया है पॠपà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ लेख में à¤à¤• à¤à¤¸à¥‡ ही संत गोसà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€Â  तà¥à¤²à¤¸à¥€à¤¦à¤¾à¤¸ के बारे में बताया गया है जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने भगवानॠराम की सगà¥à¤¨ रूप में भकà¥à¤¤à¤¿ की है पà¥

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