कृतिदेव यहां वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• यà¥à¤— में धरà¥à¤® की पà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤‚गिकता
Abstract
धरà¥à¤® मानव समाज का à¤à¤¸à¤¾ वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤•, सà¥à¤¥à¤¾à¤¯à¥€ à¤à¤µà¤‚ शाशà¥à¤µà¤¤ ततà¥à¤¤à¥à¤µ है जिसको समà¥à¤¯à¤• रूप से समà¤à¥‡ बिना हम समाज के रूप को समà¤à¤¨à¥‡ में असफल रहेंगे। वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ में मानव ने विजà¥à¤žà¤¾à¤¨ के सहारे अपने परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£ पर काफी नियंतà¥à¤°à¤£ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ कर लिया है। इसका परिणाम यह हà¥à¤† कि समाज या तो धरà¥à¤®-निरपेकà¥à¤· हो गये या धरà¥à¤® में रूचि रखते और धारà¥à¤®à¤¿à¤• विशà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥‹à¤‚ की वैधता को सà¥à¤µà¥€à¤•ार नहीं करते। फिर à¤à¥€ धरà¥à¤® आज à¤à¥€ à¤à¤• सारà¥à¤µà¤à¥Œà¤®à¤¿à¤• तथà¥à¤¯ बना हà¥à¤† है। धरà¥à¤® मानव का अलौकिक शकà¥à¤¤à¤¿ से संबंध जोड़ता है। इसका संबंध मानव की à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤“ं, शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾ à¤à¤µà¤‚ à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ से है। धरà¥à¤® मानव के आंतरिक जीवन को ही पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ नहीं करता, वरनॠउसके सामाजिक, सांसà¥à¤•ृतिक à¤à¤µà¤‚ आरà¥à¤¥à¤¿à¤• जीवन को à¤à¥€ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है। मारà¥à¤•à¥à¤¸ - ‘धरà¥à¤®â€™ को मानव के लिठ‘अफीम’ मानते हैं। इस पà¥à¤°à¤•ार धरà¥à¤® मानव जीवन का à¤à¤• पà¥à¤°à¤®à¥à¤– अंग है।1
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