भारत में कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥€à¤¯ दलों का उदà¥à¤­à¤µ à¤à¤µà¤‚ विकास

Mr. हर्षवीर

Abstract


भारत में कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥€à¤¯ दलों के निरà¥à¤®à¤¾à¤£ का अपना विशेष इतिहास है। इस तथà¥à¤¯ से इंकार नहीं किया जा सकता कि भारत में कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥€à¤¯ दलों की उतà¥à¤ªà¤¤à¤¿ का पà¥à¤°à¤®à¥à¤– कारण राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ दलों से असंतà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ का भी परिणाम रहा है और अधिकतर कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥€à¤¯ दल कांगà¥à¤°à¥‡à¤¸ पारà¥à¤Ÿà¥€ में आपसी फूट तथा पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¸à¥à¤ªà¤°à¥à¤§à¤¾ के कारण ही पनपे है। यदि वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ सनà¥à¤¦à¤°à¥à¤­ में देखा जाठतो कई कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥€à¤¯ दल तो गठबंधन राजनीति की देन है। अपने शैशवलकाल में भारत में कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥€à¤¯ दलों का उदृध व विकास राजà¥à¤¯à¥‹à¤‚ की सà¥à¤µà¤¾à¤¯à¤¤à¥à¤¤à¤¤à¤¾ की मांग, उपसंसà¥à¤•ृति के विकास, जातीयता व धरà¥à¤® की भावना आदि के कारण ही हà¥à¤† है। इसमें असंतà¥à¤²à¤¿à¤¤ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥€à¤¯ विकास ने भी अपना योगदान दिया है जो कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ विकास की मà¥à¤–à¥à¤¯ धारा से कट गठया उनकी उपेकà¥à¤·à¤¾ हà¥à¤ˆ, कालांतर में वहां कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¤µà¤¾à¤¦ की भावना का जनà¥à¤® हà¥à¤† और इससे कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥€à¤¯ दलों का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ हà¥à¤†à¥¤ वसà¥à¤¤à¥à¤¤à¤ƒ 1967 में चौथे आम चà¥à¤¨à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ के बाद कई राजà¥à¤¯à¥‹à¤‚ में गैर-कांगà¥à¤°à¥‡à¤¸à¤µà¤¾à¤¦ की जो लहर पैदा हà¥à¤ˆ आगे चलकर उसने समà¥à¤ªà¥‚रà¥à¤£ राजनीति को अपने चपेट में लिया और 1989 के बाद तो कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¤µà¤¾à¤¦ की राजनीति बदलते भारतीय राजनीतिक परिवेश में à¤à¤• अटल सतà¥à¤¯ बन गई। अतः वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ राजनीतिक परिदृशà¥à¤¯ में भी इस सतà¥à¤¯ को नकारा नहीं जा सकता कà¥à¤¯à¥‡à¤‚कि पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• आम चà¥à¤¨à¤¾à¤µ के बाद कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥€à¤¯ दलों की संखà¥à¤¯à¤¾ में निरनà¥à¤¤à¤° वृदà¥à¤§à¤¿ हो रही है। पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ शोध पतà¥à¤° में भारत के सनà¥à¤¦à¤°à¥à¤­ में कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥€à¤¯ दलों के उदà¥à¤­à¤µ à¤à¤µà¤‚ विकास पर पà¥à¤°à¤•ाश डाला गया है।

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