à¤à¥€à¤®à¤°à¤¾à¤µ अमà¥à¤¬à¥‡à¤¡à¤•र के सामाजिक विचारों का विशà¥à¤²à¥‡à¤·à¤£à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨
Abstract
अमà¥à¤¬à¥‡à¤¡à¤•र ने उस समय निमà¥à¤¨ वरà¥à¤—ों व जातियों के साथ à¤à¤• परमà¥à¤ªà¤°à¤¾à¤—त रूप से होने वाले à¤à¥‡à¤¦-à¤à¤¾à¤µ को देखा था। कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि वे सà¥à¤µà¤‚य à¤à¥€ इस कारण से कई बार अपमानित हà¥à¤ थे। यह अपमान उनको महार जाति में जनà¥à¤® लेने के कारण देखना पडा। इसलिठउनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने à¤à¤¾à¤°à¤¤ में ततà¥à¤•ालीन परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ जो कि सामाजिक वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ थी, को बदलने के लिठअथक पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ किà¤à¥¤ हालांकि वे यह चाहते थे कि à¤à¤¾à¤°à¤¤ में दलित व उतà¥à¤ªà¥€à¤¡à¤¿à¤¤ वरà¥à¤— सà¥à¤µà¤‚य अपने पà¥à¤°à¤¯à¤¤à¥à¤¨à¥‹à¤‚ से जातिवाद व बà¥à¤°à¤¾à¤¹à¥à¤¨à¤¾à¤£à¤µà¤¾à¤¦ की इस बà¥à¤°à¤¾à¤ˆ से मà¥à¤•à¥à¤¤ हो जाà¤à¥¤ वे लोकमानà¥à¤¯ बाल गंगाधर तिलक के इस मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ से सहमत थे कि वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को अधिकार दान-दहेज या फिर à¤à¤¿à¤•à¥à¤·à¤¾ से नहीं मिलते बलà¥à¤•ि उनकों पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करने के लिठतो समाज में वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ बà¥à¤°à¤¾à¤ˆà¤¯à¥‹à¤‚, सामाजिक ढांचे तथा परमà¥à¤ªà¤°à¤¾à¤“ं के साथ संघरà¥à¤· करना पडता है।
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