मीमांसा तŸव वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में शकà¥à¤¤à¤¿ का निरूपण

डॉ सरोज बाला

Abstract


कारण के संबंध की वà¥à¤¯à¤¾à¤–à¥à¤¯à¤¾ में à¤à¤• नीवन दृषà¥à¤Ÿà¤¿ का परिचय देती है। कारà¥à¤¯ की उतà¥à¤ªà¤¿Å¸à¤¾ के लिठकारण के अतिरिकà¥à¤¤ ‘शकà¥à¤¤à¤¿â€˜ भी माननी चाहिà¤à¥¤ बीजों से अंकà¥à¤° पैदा किठजा सकते हैं यह बात सतà¥à¤¯ है, परनà¥à¤¤à¥ किसी भी कारण से जैसे बीज को भून देना या बीज को किटनाशकों से बचा कर न रखनां à¤à¤¸à¥‡ कई कारण है जिसके दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ उनकी दोबारा से अंकà¥à¤° उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ करने की शकà¥à¤¤à¤¿ नषà¥à¤Ÿ हो जाती है। तब मनà¥à¤·à¥à¤¯ लाख परिशà¥à¤°à¤® करके भी उनसे अंकà¥à¤° उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ नहीं कर सकता है। जब तक यह शकà¥à¤¤à¤¿ बीज के अनà¥à¤¦à¤° बनी रहती है तभी तक उनसे अंकà¥à¤° उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ किया जा सकता है। इसलिठमीमांसा बीज से अतिरिकà¥à¤¤ ‘शकà¥à¤¤à¤¿â€˜ को भी कारण की सहायता देने वाला पदारà¥à¤¥ मानना ही चाहिà¤à¥¤ इस पà¥à¤°à¤•ार मीमांसा की दृषà¥à¤Ÿà¤¿ में शकà¥à¤¤à¤¿ à¤à¤• विशिषà¥à¤Ÿ पदारà¥à¤¥ है।

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