मेवाती समाज और संसà¥à¤•ृति . à¤à¤• à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨

शर्मिला यादव

Abstract


संसà¥à¤•ृति को समाज का आईना कहा जाता है। किसी भी देश की सामाजिक और आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤•, बौदà¥à¤§à¤¿à¤• विभूति को संसà¥à¤•ृति के नाम से जाना जाता हैं। पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ संसà¥à¤•ृतियों में से à¤à¤• भारतीय संसà¥à¤•ृति को अनेक उतार . चढावों से गà¥à¤œà¤°à¤¨à¤¾ पडा है। फिर भी आज भारतीय सभà¥à¤¯à¤¤à¤¾ और संसà¥à¤•ृति जीवित रही है। यहा पर बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¤¿à¤¶ कूटनीति ने देश का विभाजन कर दिया परनà¥à¤¤à¥ फिर भी हमारे देश में à¤à¤•ता और सांसà¥à¤•ृतिक समगà¥à¤°à¤°à¥‚पता देखने को मिलती हैं। इसी पà¥à¤°à¤•ार पूरे भारतवरà¥à¤· में हरियाणा कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° की उसकी संसà¥à¤•ृति के कारण à¤à¤• अलग ही पहचान हैं। वैसे भी किसी कौम की संसà¥à¤•ृति उसके सामाजिक, आरà¥à¤¥à¤¿à¤•, धारà¥à¤®à¤¿à¤•, सांसà¥à¤•ृतिक जीवन का आईना होता हैं। संसà¥à¤•ृति में मनà¥à¤·à¥à¤¯ के विचार, रूचि, विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ और आदरà¥à¤¶ समविषà¥à¤Ÿ रहते हैं। अगर हम हरियाणा के इतिहास का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ से अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ करे तो यह देखने को मिलता है कि मेवात कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में रहने वाले मेवों की संसà¥à¤•ृति, à¤à¤• समà¥à¤ªà¥‚रà¥à¤£ संसà¥à¤•ृति हैं। मेवातीयों का रहन . सहन, उनके रीति . रिवाज, सामाजिक जीवन तथा लोक साहितà¥à¤¯ का हरियाणा कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में अलग ही पहचान हैं। इस शोध लेख में मेवात कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में रहने वाले मेवों के समाज व संसà¥à¤•ृति का वरà¥à¤£à¤¨ किया जायेगा

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