वैदिक साहितà¥à¤¯ में धरà¥à¤® और दरà¥à¤¶à¤¨

Mr. देवेन्द्र

Abstract


धरà¥à¤® की अगर बात करे तो इसका साधारण शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ में अरà¥à¤¥ हैं जो धारण करने योगà¥à¤¯ हैं वही धरà¥à¤® हैं। यहां हम धरà¥à¤® के बारे में ये कह सकते हैं कि यह कà¥à¤² मिलकार नैतिक मूलà¥à¤¯à¥‹à¤‚ का à¤à¤• समूह मातà¥à¤° हैं , जो मनà¥à¤·à¥à¤¯ के लिठनितांत आवशà¥à¤¯à¤• हैं। आज हम दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में कई धरà¥à¤®à¤¾à¤‚ को पाते है लेकिन अगर हम सूकà¥à¤·à¥à¤® दृषà¥à¤Ÿà¤¿ से देखे तो उनमें हमें कई बाते à¤à¤• समाज दिखाई देती हैं वो हैं नैतिकता लेकिन कहीं ना कहीं जहां तक मà¥à¤à¥‡ समठआया हैं इसमें हमें à¤à¤• डर का भाव भी दिखाई देता हैं जिसमें पारलौकिक शकà¥à¤¤à¤¿à¤…यों के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ डर को भी दिखाया गया हैं। हाठयह सतà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤¤ होता कि धरà¥à¤® के कारण मनà¥à¤·à¥à¤¯ जाति आधà¥à¤¯ सà¥à¤– पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करती रही हैं , मà¥à¤¸à¥€à¤¬à¤¤ के समय धरà¥à¤® उनके लिये à¤à¤• सबल बन कर उभरा हैं लेकिन वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को देखे या फिर इतिहास का विदà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥à¤¥à¥€ होने के नाते जब अतीत पर नजर डालते हैं तो धरà¥à¤® के नाम पर इस दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में अतà¥à¤¯à¤¾à¤šà¤¾à¤° भी बहà¥à¤¤ हà¥à¤ हैं ।लेकिन हमारे यहां धरà¥à¤® और खासकर वैदिक धरà¥à¤® की बात करेंगे उसमें उसके आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• पकà¥à¤· की तरफ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देंगें। अगर हम दरà¥à¤¶à¤¨ की बात करे तो यह वह जà¥à¤žà¤¾à¤¨ हैं जो मनà¥à¤·à¥à¤¯à¤¤à¤¾ के बारे में हमारी समठविकसित करता हैं। जीवन कà¥à¤¯à¤¾ उसका उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ कà¥à¤¯à¤¾ हैं कà¥à¤² मिलाकर सतà¥à¤¯ की खोज ही दरà¥à¤¶à¤¨ हैं यहां हम वैदिक समय में भारतीय दरà¥à¤¶à¤¨ के बारे में बात करेंगें । उस समय की सोच समठया कहे उनकी विदà¥à¤µà¤¤à¤¾ की बात करेंगें।


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