पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ भारतीय इतिहास के साहितà¥à¤¯à¤¿à¤• सà¥à¤°à¥‹à¤¤

Rajiv Maan

Abstract


वसà¥à¤¤à¥à¤¤à¤ƒ पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ भारतीय इतिहास में अनà¥à¤¸à¤‚धान कारà¥à¤¯ को अमली जामा पहनाना अतà¥à¤¯à¤‚त ही दà¥à¤·à¥à¤•र कारà¥à¤¯ है। कई बार पà¥à¤°à¤¾à¤¤à¤¾à¤¤à¥à¤µà¤¿à¤• पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£ इतने अधिक असà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ पà¥à¤°à¤µà¥ƒà¤¤à¤¿ के होते हैं कि अनà¥à¤¸à¤‚धानकरà¥à¤¤à¥à¤¤à¤¾ को अपनी मानसिक दृषà¥à¤Ÿà¤¿ थोपने का अवसर पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हो जाता है और वह अपने कथà¥à¤¯ और मनà¥à¤¤à¤µà¥à¤¯ के समरà¥à¤¥à¤¨ में उपलबà¥à¤§ साकà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚ व पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£à¥‹à¤‚ के साथ सà¥à¤µà¤¯à¤‚ की बात भी शामिल कर लेता है। यदि पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ भारतीय इतिहास के पà¥à¤°à¤¾à¤¤à¤¾à¤¤à¥à¤µà¤¿à¤• सà¥à¤°à¥‹à¤¤à¥‹à¤‚ तथा साहितà¥à¤¯à¤¿à¤• सà¥à¤°à¥‹à¤¤à¥‹à¤‚ में भेद किया जाये तो साहितà¥à¤¯à¤• सà¥à¤°à¥‹à¤¤ भी कम महतà¥à¤µ के नहीं हैं। वैदिक यà¥à¤— से लेकर पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ भारतीय इतिहास के समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§ में अनेकों साहितà¥à¤¯à¤• गà¥à¤°à¤‚थ लिखे गठहैं। इस समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§ में धरà¥à¤®à¤¶à¤¾à¤¸à¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚, अरà¥à¤¥à¤¶à¤¾à¤¸à¥à¤¤à¥à¤°, महाकावà¥à¤¯, पà¥à¤°à¤¾à¤£, अरबी व फारसी रचनाà¤à¤‚ तथा चीनी यातà¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के विवरण इस शोध पतà¥à¤° में शामिल करते हà¥à¤ शोध को गति दी गई है और उपलबà¥à¤§ साहितà¥à¤¯ के आधार पर ही शोध पतà¥à¤° लिखा गया है तथा यह दà¥à¤µà¤¿à¤¤à¥€à¤¯à¤• सà¥à¤°à¥‹à¤¤à¥‹à¤‚ पर आधारित है।


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