राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ की मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® सà¥à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤ƒ à¤à¤• à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨

शकुन्तला मीणा, कमलेश सिंह महरिया

Abstract


राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ में हालांकि मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® धरà¥à¤®, मà¥à¤¸à¤²à¤®à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ के बीच भà¥à¤°à¤¾à¤¤à¥ƒà¤¤à¥à¤µ में विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ करता है व जातिवाद व ऊà¤à¤š-नीच को नहीं मानता परनà¥à¤¤à¥ वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤•ता में राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€ मà¥à¤¸à¤²à¤®à¤¾à¤¨ महिलाओं में जातिवाद विदà¥à¤¯à¤®à¤¾à¤¨ है। जाति के आधार पर ही वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को समाज में उचà¥à¤š व निमà¥à¤¨ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ होती व रही है। इनà¥à¤¹à¥€ तथà¥à¤¯à¥‹à¤‚ का शोध अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ का मà¥à¤–à¥à¤¯ उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ रखते हà¥à¤ पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ शोध अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ की मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€à¤¯à¥‹à¤‚ की पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤ƒ à¤à¤• à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ विषय को चà¥à¤¨à¤¾ गया है। किसी भी देषकाल और समाज में सà¥à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की दषा पूरà¥à¤£à¤¾à¤¤à¤¾ सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤° और समान नहीं है। मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ में यह सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ अधिक चिंताजनक है। भारतीय परिदृषà¥à¤¯ में मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® औरतों की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ पर विचार करने के लिठसà¥à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की दषा पर विचार करना आवषà¥à¤¯à¤• है। कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि भारतीय मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® सà¥à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की दषा अनà¥à¤¯ धरà¥à¤®à¥‹à¤‚ या समà¥à¤¦à¤¾à¤¯à¥‹à¤‚ की सà¥à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से बहà¥à¤¤ भिनà¥à¤¨ नहीं है। अधिकार और विचार, किसी भी सà¥à¤¤à¤° पर उनकी सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤°à¤¤à¤¾ और समानता की बात तो दूर कई बार तो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ समानà¥à¤¯ जीवन सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ भी नसीब नहीं होती। बावजूद इसके उनकी जिजीविषा तो वाकई हतपà¥à¤°à¤­ और सà¥à¤¤à¤¬à¥à¤§ कर देती है। विषम परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में भी वे न सिरà¥à¤« अपना असà¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ बनाठरखती हैं बलà¥à¤•ि हर भूमिका को सफलता पूरà¥à¤µà¤• और सहजता के साथ निरà¥à¤µà¤¾à¤¹à¤¨ भी कर लेती हैं। इस जीवजगत में उनसा कठजीवी दूसरा पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥€ मिलना तो नितांत असंभव ही है। अपने तमाम शà¥à¤°à¤®, सृजन, संवेदना, निषà¥à¤ à¤¾ और असà¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ को उपेकà¥à¤·à¤¿à¤¤ किठजाने के बावजूद कतà¥à¤¤à¤µà¤°à¥à¤¯ पथ पर निरंतर सकà¥à¤°à¤¿à¤¯ उनसा करà¥à¤®à¤¯à¥‹à¤—ी तो अनà¥à¤¯à¤¤à¥à¤° दà¥à¤°à¥à¤²à¤­ ही है। जिसके होने से दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ का असà¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ है और जो अपने असà¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ को मिटाकर भी दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ का सृजन करने का मादà¥à¤¦à¤¾ रखती है। किसी भी सभà¥à¤¯ समाज में उसकी अवेहलना चिंतनीय ही नहीं निनà¥à¤¦à¤¾à¤¨à¥€à¤¯ भी है। सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤°à¤¤à¤¾ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ के पषà¥à¤šà¤¾à¤¤ हिनà¥à¤¦à¥€ साहितà¥à¤¯ में मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® उपनà¥à¤¯à¤¾à¤¸à¤•ारों ने अपने सारà¥à¤¥à¤• हसà¥à¤¤à¤•à¥à¤·à¥‡à¤ª से मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® समाज को समà¤à¤¨à¥‡ में काफी मदà¥à¤¦ मिली है।


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